यूरी गगारिन आंतरिक्ष में जाने वाले पहले व्यक्ति थे उन्होंने वोस्तोक 1 नामक अन्तरिक्ष यान में अपनी यात्रा की थी। यूरी गगारिन का जज्बा और हिम्मत थी कि वो अंतरिक्ष मे गए थे।12 अप्रैल 1961 का वो ऐतिहासिक दिन जब यूरी गागरिन अंतरिक्ष यात्रा के लिए रवाना हुए थे। अंतरिक्ष मे मानव को ले जाने वाले यान का नाम “वोस्तक प्रथम” था। इस यान के कैप्सूल में यूरी गागरिन Yuri Gagarin बैंठे हुए थे। यह यान इतना छोटा था कि यूरी गागरिन इस यान को कंट्रोल नही कर सकते थे। यूरी ने यह यात्रा लेटकर ही पूरी की थी।
यूरी गगारिन ने बेक़ानूर स्टेशन से सुबह 7 बजकर 7 मिनट का वक्त था जब यूरी गगारिन ने बेक़ानूर स्टेशन से अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी थी। अंतरिक्ष के लिए जाते वक्त यूरी गागरिन के शब्द थे “पोयखाली” जिसका अर्थ है “अब हम चले”। सुबह 10.55 पर यूरी गागरिन वापस धरती पर लौट आये। यह अंतरिक्ष मे मानव का प्रथम कदम था और यूरी गगारिन अंतरिक्ष मे जाने पहले इंसान बने थे।इस अंतरिक्ष यात्रा के बाद यूरी गगारिन विश्व प्रसिद्ध हो गए। उनको कई सारे सम्मान और मेडल्स से नवाजा गया। यूरी गागरिन को सोवियत का सर्वोच्च सम्मान सोवियत संघ हीरो से नवाजा गया।
यूरी गगारिन का जन्म 9 मार्च, 1934 को रूस के एक सुदूर स्थित क्लुशिनो गांव में हुआ था।उनके पिता एलेक्सी एवोंविच गागरिन बढाई का काम किया करते थे और माँ अन्ना टिमोफेय्ना गागरिन दूध की डेयरी में काम करती थी। वो चार भाई-बहन थे । बचपन से ही गणित और भौतिकी में यूरी की बहुत रुचि थी। यूरी गगारिन को ऐसे स्कूल में डाला गया जिसमे एक बड़ी सी एयरक्रॉफ्ट फैक्टरी थी।उनका स्कूल उनके लिये प्रेरणाओ से भरा था उन्हें प्रयोगशालाओं में काम होते देखना बोहत प्रेरित करता था। उनके अंदर एक एक टेस्ट पायलट बनने की इच्छा जागृत हो गई । यूरी गगारिन अक्सर इन पायलटों की तारीफ किया करते।
यूरी गगारिन ने एक कारखाने में इंजन के भागों के मोल्डर की नौकरी कर ली और नौकरी के साथ साथ रत में अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। तकनीकों के प्रति उनकेआकर्षण ने उनके के सपने को सच कर दिया और उन्हें सैराटेव के इंडिस्ट्रियल कॉलेज में दाखिला मिल गया। वर्ष 1955 में उन्होंने एयफोर्स ट्रेनिंग सेंटर में विद्यार्थी के रूप में अड्मिशन ले लिया। दो सालो में वह अच्छे अंको से पास हुए और रशियन एयरफोर्स में बतौर पायलट नियुक्त हो गए।
च्कलोवस्की एयर बेस से फ्लाइट की दैनिक ट्रेनिंग करते समय वह और उनके फ्लाइट प्रशिक्षकव्लादिमीर सेर्योगिन की1968 में 27 मार्च को यूरी का जेट मिग १५ (MiG-15) ट्रेनर क्रैश हो गया जिसमे उनकी मृत्यु हो गई। गैगरिन और सेर्योगिन के शव को रेडस्क्वायर पर दफनाया गया और वही उनका अंतिम संस्कार भी किया गया था।