अभी कुछ दिन पहले , केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री द्वारा ‘ग्रीन टैक्स’ लगाए जाने हेतु निम्नलिखित प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है:
पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले पुराने वाहनों पर “ग्रीन टैक्स” लगाने हेतु , सरकारी विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के स्वामित्व वाले, 15 वर्ष से अधिक समय से इस्तेमाल हो रहे वाहनों का पंजीकरण रद्द करने और उन्हें उपयोग से बाहर करने की नीति के लिए,‘ग्रीन टैक्स’ से प्राप्त राजस्व को एक अलग खाते में रखा जाएगा और इसका उपयोग प्रदूषण से निपटने व उत्सर्जन निगरानी के लिए राज्यों में अत्याधुनिक सुविधाएं स्थापित करने के लिए किया जाएगा।
किन वाहनों पर ‘ग्रीन टैक्स’ लगाया जाएगा?
8 साल से अधिक पुराने परिवहन वाहनों पर फिटनेस प्रमाणपत्र के नवीकरण के समय रोड टैक्स के 10 से 25 फीसदी की दर से ग्रीन टैक्स लगाया जा सकता है।
निजी वाहनों पर 15 वर्षों के बाद पंजीकरण प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के समय ग्रीन टैक्स लगाया जाए।
सार्वजनिक परिवहन के वाहनों जैसे सिटी बसों पर कम ग्रीन टैक्स लगाया जाए।
अत्यधिक प्रदूषित शहरों में पंजीकृत वाहनों के लिए अधिक टैक्स (रोड टैक्स का 50 फीसदी) वसूला जाएगा।
ईंधन (पेट्रोल/डीजल) और वाहनों के प्रकार के मुताबिक अलग-अलग टैक्स होंगे।
‘ग्रीन टैक्स’ से छूट:
हाइब्रिड, इलेक्ट्रिक वाहनों और वैकल्पिक ईंधनों जैसे सीएनजी, एथेनॉल, एलपीजी आदि से चलने वाले वाहनों को इससे बाहर रखा जाएगा।
खेती में इस्तेमाल होने वाले वाहनों जैसे ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, टिलर आदि पर ग्रीन टैक्स नहीं लगाया जाएगा।
“ग्रीन टैक्स” से होने वाले लाभ:
पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले वाहनों का उपयोग करने से लोगों को दूर करना।
लोगों को नए और कम प्रदूषण वाले वाहन खरीदने के लिए प्रेरित करना।
ग्रीन टैक्स प्रदूषण के स्तर को कम करेगा और प्रदूषण के लिए प्रदूषकों को भुगतान करना होगा।
आवश्यकता:
यह अनुमान लगाया गया है कि वाणिज्यिक वाहन, जोकि कुल वाहनों का लगभग 5 फीसदी है, कुल प्रदूषण के लगभग 65-70 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं।
पुराने वाहनों के बेड़े में आमतौर पर वर्ष 2000 से पहले निर्मित वाहन लगभग मात्र 1 फीसदी हैं, किंतु कुल वाहनों से होने वाले प्रदूषण में इनका लगभग 15 फीसदी हिस्सा होता है। ये पुराने वाहन आधुनिक वाहनों की तुलना में 10-25 गुना अधिक प्रदूषण करते हैं।