सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एम्स के पैनल ने तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता के इलाज में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होने से इंकार किया है। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती होने से पहले जयललिता डायबटीज, चक्कर आने, सूजन, चिड़चिड़ेपन, हाइपोथायरायड और क्रोनिक ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों से पीड़ित थीं।
दरअसल, बीमार होने के बाद जयललिता को चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां उनकी मौत हो गई थी। 30 नवंबर, 2021 को जयललिता के मौत का कारण जानने के लिए न्यायमूर्ति अरुमुगासामी आयोग की सहायता के लिए छह सदस्यी पैनल गठित किया गया था।
अंगूर, केक और मिठाई खा रहीं थीं – कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संदीप सेठ के नेतृत्व में बने पैनल ने अपोलो अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड्स की छानबनी की। इसके साथ ही रेडियोलॉजी से संबंधित जांच के रिकॉर्ड भी खंगाले गए। पैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती होने से पहले जयललिता अंगूर, केक और मिठाइयां खा रहीं थीं। डॉ. शिवकुमार ने 19 सितंबर, 2016 को जयललिता के स्वास्थ्य की जांच की थी।
भर्ती -रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 सितंबर, 2016 को सीएम हाउस में एंबुलेंस बुलाई गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल में भर्ती कराने से पहले जांच में डॉक्टरों ने पाया कि जयललिता अपने होश में नहीं। उनका ब्लड प्रेशर और नब्ज भी अस्थिर थी।
कार्डिएक अरेस्ट -पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि जयललिता का अपोलो अस्पताल में सही तरीके से इलाज चल रहा था। उन्हें चार दिसंबर, 2016 को कार्डिएक अरेस्ट पड़ा था। इसके बाद पांच दिसंबर को अपोलो और एम्स के डॉक्टरों की टीम ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।