साल 2021 में दिलीप कुमार को सांस लेने में तकलीफ के चलते, 98 साल की उम्र में 7 जुलाई 2021 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसम्बर, 1922 को वर्तमान पाकिस्तान के पेशावर शहर में हुआ था। उनके बचपन का नाम ‘मोहम्मद युसूफ़ ख़ान था। उनके पिता का नाम लाला ग़ुलाम सरवर था जो फल बेचकर अपने परिवार का ख़र्च चलाते थे। पिता के व्यापार में घाटा होने के कारण वह पुणे की एक कैंटीन में काम करने लगे थे। यहीं देविका रानी की पहली नज़र उन पर पड़ी और उन्होंने दिलीप कुमार को अभिनेता बना दिया। देविका रानी ने ही ‘युसूफ़ ख़ान’ की जगह उनका नया नाम ‘दिलीप कुमार’ रखा। पच्चीस वर्ष की उम्र में दिलीप कुमार देश के नंबर वन अभिनेता के रूप में स्थापित हो गए थे।
उनके जाने के बाद पत्नी सायरा बानो की जिंदगी में जो सूनापन आया उसे कोई नहीं भर सकता है। दोनों की ये जोड़ी इंडस्ट्री की सबसे पुरानी और मजबूत जोड़ी में से एक रही। जब भी अगर जिक्र दिलीप साहब का हो तो सायरा बानो का नाम न लिया जाए ऐसा तो हो ही नहीं सकता। उम्र में बड़ा फासला होने के बाद भी दोनों के बीच कभी कोई कड़वाहट की बात सामने नहीं आई और हमेशा एक दूसरे का साथ निभाया। आखिरी दम तक सायरा दिलीप कुमार की साथ रहीं और अभिनेता के निधन के बाद वह इस तरह टूट गई थीं कि उन्होंने लोगों से मिलना-जुलना भी कर दिया था।
हिंदी सिनेमा में सायरा बानो और दिलीप कुमार की लव स्टोरी बहुत ही लोकप्रिय रही।
12 साल की उम्र से करती थीं प्यार- अभिनेत्री सायरा बानो महज 12 साल की थीं जब वो दिलीप कुमार से प्यार करने लगी थीं। दरअसल वह जब पहली बार फिल्म ‘आन’ देखने गई थीं और उन्होंने जब दिलीप साहब को पर्दे पर देखा तो बस देखती ही रह गईं और उन्होंने उसी समय सोच लिया था कि एक दिन वह उन्हें अपना बना लेंगी। यहां तक कि सायरा ने उन्हें इंप्रेस करने के लिए उर्दू और पर्शियन तक सीखी थी ।
सायरा बानो की दिलीप साहब से पहली मुलाकात 1960 में फिल्म मुगल-ए-आजम के सेट पर हुई थी। हालांकि उस समय दिलीप कुमार ने उनपर कोई ध्यान नहीं दिया, क्योंकि उस समय उनकी उम्र बहुत कम थी और इसलिए दिलीप साहब भी वह उन्हें एक छोटी बच्ची की तरह ट्रीट कर रहे थे, लेकिन सायरा तो दिल ही दिल में उन्हें अपना मान बैठी थीं। अब फिल्मों में आने के सिवाय सायरा बानो के पास कोई और रास्ता नहीं था। इसलिए उन्होंने अपनी मां से फिल्मों में काम करने की इच्छा जाहिर की।
1960 में फिल्म मुगल-ए-आजम रिलीज होने के ठीक एक साल बाद 1961 में सायरा बानो की फिल्म ‘जंगली’ रिलीज हुई औऱ इसके बाद उनकी एक के बाद एक कई फिल्में आती गईं। हालांकि अभी भी वह इस इंतजार में थीं कि कब उनकी जोड़ी दिलीप साहब के साथ बनेगी। वह दिन भी आ गया जब फिल्म में दोनों को लिए जाने की बात हुई लेकिन दिलीप साहब ने ये कहते हुए मना कर दिया कि सायरा की उम्र बहुत कम है ऐसे में जोड़ी बेमेल लगेगी और एक बार फिर से सायरा का दिल टूट गया।
पहली बार दिलीप कुमार को हुआ अहसास- जहां सायरा बानो दिलीप साहब को दीवानों की तरह चाहती थीं, वहीं अभिनेता उनमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे, लेकिन जब सायरा के जन्मदिन के मौके पर दिलीप कुमार उनके घर पहुंचे तो उन्हें देखते ही रह गए। ये पहला मौका था उस दिन दिलीप साहब को एहसास हुआ कि सायरा बिल्कुल अलग हैं। इसके बाद दोनों को प्यार हो गया और 11 अक्टूबर 1966 को दोनों ने शादी कर ली। दिलीप कुमार 44 वर्ष और सायरा बानो की 22 वर्ष की थीं। उनके उम्र का फासला कभी उनके बीच नहीं आया और आखिरी दम तक सायरा दिलीप के साथ रहीं।
करियर – दिलीप कुमार ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म ‘ज्वार भाटा’ से की, जो वर्ष 1944 मे आई। हालांकि यह फ़िल्म सफल नहीं रही। उनकी पहली हिट फ़िल्म “जुगनू” थी। 1949 में फ़िल्म “अंदाज़” में दिलीप कुमार ने पहली बार राजकपूर के साथ काम किया। यह फ़िल्म एक हिट साबित हुई। दीदार (1951) और देवदास (1955) जैसी फ़िल्मों में गंभीर भूमिकाओं के लिए मशहूर होने के कारण उन्हें ट्रेजडी किंग कहा जाने लगा। मुग़ले-ए-आज़म (1960) में उन्होंने मुग़ल राजकुमार जहाँगीर की भूमिका निभाई। “राम और श्याम” में दिलीप कुमार द्वारा निभाया गया दोहरी भूमिका (डबल रोल) आज भी लोगों को गुदगुदाने में सफल साबित होता है। 1970, 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने कम फ़िल्मों में काम किया। इस समय की उनकी प्रमुख फ़िल्में थीं: क्रांति (1981), विधाता (1982), दुनिया (1984), कर्मा (1986), इज़्ज़तदार (1990) और सौदागर(1991)। 1998 में बनी फ़िल्म “क़िला” उनकी आखिरी फ़िल्म थी।उन्होने रमेश सिप्पी की फिल्म शक्ति मे अमिताभ बच्चन के साथ काम किया। इस फिल्म के लिए उन्हे फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार भी मिला।