लोग बैलगाड़ी से जाते हैं , मंदिर दर्शन करने – किराया पांच से आठ हजार रूपये

0
584

बैलगाड़ी शब्द सुनते ही हमें पुराने ज़माने के दिन याद आने लगते है। पहले के समय में ऐसे परिवहन के साधन के रूप में भी उपयोग किया जाता था। भारत के ग्रामीण इलाकों में इसे आज भी प्रयोग में लाया जाता है। इस गाड़ी को दो बैलों द्वारा खिंचा जाता है और इसे परिवहन के रूप में सबसे सस्ता और टिकाऊ साधन माना जाता है।वैसे तो ग्रामीण इलाकों में इसकी सवारी करने का कोई पैसा नहीं देना होता। लेकिन हम आपको ऐसी जगह से परिचित करेंगे जहा बैलगाड़ी का किराया आपको हजारो रूपये देना पड़ता है

भगवान ऋषभदेव का प्रसिद्ध मंदिर

मप्र के रतलाम जिले के बिबरोड गांव में भगवान ऋषभदेव का प्रसिद्ध जैन मंदिर स्थित है। यहां तक बैलगाड़ी से पहुंचने के लिए लोग 5-6 किलोमीटर तक का सफर तय करने के लिए लोग लगभग 5-6 हजार रूपये भुगतान
करते हैं। पर ,ऐसा तब होता है जब पूस माह की अमावस्या के दिन ज्यादा संख्या में जैन श्रद्धालु इस प्रसिद्ध मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

लोग बैलगाड़ी से जाते हैं , दर्शन करने – ऐसे मान्यता है

मान्यता के रूप में कहा है कि भगवान ऋषभदेव के मंदिर तक बैलगाड़ी से पहुंचने पर परिवार में खुशियां और समृद्धि आती है और जीवन में आने वाली सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। यही वजह है कि इस क्षेत्र में बैलगाड़ियों की संख्या काफी अधिक है। मंदिर में दर्शन करने से पहले ज्यादातर श्रद्धालु यहां आने के लिए बैलगाड़ी बुक कर लेते हैं। अगर दो या तीन सदस्यों को छोटा परिवार है तो इसके लिए 2-3 हजार रूपये का किराया लगता है। और बड़े परिवार के लिए पांच से आठ हजार रूपये का किराया लगता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here