बरगद के पेड़ को दूसरे नाम वट वृक्ष से भी जाना जाता है इसे राष्ट्रीय वृक्ष के रूप में जाना जाता है और बरगद के पेड़ का वैज्ञानिक नाम फाइकस बेंगालेंसिस है. इस वृक्ष की कई खासियतें और फायदे हैं. ये औषधीय गुणों से भरपूर है.हमारे भारत में हिन्दू लोग इसकी पूजा अर्चना करते है भारत के इतिहास में और लोक कथाओं का भाग रह चूका है
वट वृक्ष की तत्वों की बात करें तो इसमें एंथोसाइनिडिन, कीटोंस, फिनोल, टैनिन्स, सैपोनिंस, स्टेरोल्स और फ्लेवोनॉयड जैसे तत्व होते हैं. खासकर इसकी पत्तियों में जो पोषक तत्व होते है उनमें प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और फास्फोरस तत्व शामिल हैं.
आइये जानते है इस वट वृक्ष के फायदे इसके इस्तमाल से दांतों में सड़न और मसूड़ों में सूजन कम करता है इसकी जड़ो को चबाने पर और मुलायम करने पर इसको मंजन या दातून के रूप में इस्तमाल कर सकते है पेड़ में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं.
हमारे स्किन पर दाने और फोड़े-फुंसी हो जाती है तो बरगद की जड़ प्रयोग करके इस समस्या को दूर किया जा सकता है इसके लिए आपको इसकी जड़ को पीसकर इसका लेप बनाकर त्वचा पर लगा सकते हैं. इसमें मौजूद एंटी-माइक्रोबियल तत्व बैक्टीरिया को ख़त्म करने में हेल्प करता है साथ ही एंटी इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को रोकने में मदद करता है
कई लोगो को उम्र के साथ साथ जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ जाती है इसके मदद से यह समस्या दूर करने में भी मदद करता है इसके लिए बरगद के पेड़ की पत्तियों का अर्क निकाल कर दर्द वाली जगह पर हल्के हाथों से लगाकर कुछ देर मालिश करने से दर्द कम होता है.एंटी इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करने में मदद करता है.
स्किन पर होने वाले बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण हमें खुजली जैसी परेशानी हो जाती है. इसके लिए बरगद के पत्ते या इसकी छाल का लेप बनाकर खुजली वाली जगह पर इस्तेमाल किया जा सकता है. बरगद में मौजूद एंटी-माइक्रोबियल गुण खुजली को दूर करने में मददगार साबित होता है.
इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. इसका इस्तमाल करने से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें.