प्रदूषण का वर्तमान स्तर और ‘बेहद खराब’ श्रेणी
आज 21 जनवरी 2026 को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत AQI 341 दर्ज किया गया है, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। पिछले कुछ दिनों में यह स्तर 400 के पार यानी ‘गंभीर’ श्रेणी में भी पहुँचा था। आनंद विहार, जहांगीरपुरी और वजीरपुर जैसे हॉटस्पॉट इलाकों में हवा की गुणवत्ता सबसे अधिक खराब है, जहाँ AQI अक्सर 380 से 400 के बीच झूल रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि शहर की हवा सांस लेने के लिए सुरक्षित नहीं है।
कोहरे और स्मॉग का दोहरा हमला
राजधानी में केवल प्रदूषण ही नहीं, बल्कि मौसम की मार भी पड़ रही है। सुबह के समय मध्यम से घना कोहरा छाए रहने के कारण दृश्यता (Visibility) काफी कम हो गई है। जब यह कोहरा वाहनों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं के साथ मिलता है, तो यह ‘स्मॉग’ का रूप ले लेता है। यह जहरीली धुंध जमीन के करीब ही फंसी रहती है क्योंकि हवा की गति बहुत धीमी है। इस वजह से प्रदूषक कण (PM2.5 और PM10) वातावरण में फैल नहीं पा रहे हैं, जिससे लोगों को आँखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य पर पड़ता गंभीर प्रभाव
प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य के लिए एक आपातकाल जैसा है। डॉक्टरों के अनुसार, हवा में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़ों के गहराई तक पहुँचकर श्वसन संबंधी बीमारियों को जन्म दे रहे हैं। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अस्थमा या दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह समय अत्यंत घातक है। लंबे समय तक इस वातावरण में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है और थकान, सिरदर्द व सांस फूलने जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग सुबह की सैर से बचें और बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाले मास्क का प्रयोग करें।
प्रदूषण के प्रमुख कारण और मौसमी बदलाव
इस जहरीली हवा के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। सर्दियों के दौरान ‘तापमान व्युत्क्रमण’ (Temperature Inversion) की स्थिति बनती है, जहाँ ठंडी हवा प्रदूषकों को जमीन के पास ही रोक लेती है। इसके अलावा, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और उद्योगों का धुआं स्थिति को और बिगाड़ देता है। हालांकि अब पराली जलाने की घटनाएं कम हैं, लेकिन स्थानीय कारकों और प्रतिकूल मौसम ने हवा को स्थिर बना दिया है। फिलहाल हल्की हवाएं भी इन कणों को शहर से बाहर धकेलने में नाकाम साबित हो रही हैं।
प्रशासन की कार्रवाई और GRAP के नियम
बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने ‘ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान’ (GRAP) के तहत सख्त कदम उठाए हैं। 20 जनवरी तक स्थिति ‘गंभीर’ होने के कारण GRAP-4 लागू था, जिसे अब थोड़ा सुधार होने पर हटाकर GRAP-3 के स्तर पर रखा गया है। इसके तहत गैर-जरूरी निर्माण कार्यों पर रोक, धूल नियंत्रण के लिए सड़कों पर पानी का छिड़काव और कुछ श्रेणी के वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध जारी है। सरकार ने निजी संस्थानों से घर से काम (Work from Home) को बढ़ावा देने और नागरिकों से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की है ताकि सड़कों पर भीड़ और धुआं कम हो सके।
भविष्य का अनुमान और राहत की उम्मीद
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्लीवासियों को इस दमघोंटू हवा से राहत मिलने की उम्मीद 23 जनवरी के बाद ही है। एक सक्रिय ‘पश्चिमी विक्षोभ’ के कारण 23 और 24 जनवरी को दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। बारिश होने से हवा में मौजूद प्रदूषक कण जमीन पर बैठ जाएंगे (Washout effect), जिससे AQI में काफी सुधार देखने को मिल सकता है। तब तक वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ या ‘खराब’ श्रेणी के बीच ही रहने का अनुमान है। लोगों को आगामी दो दिनों तक विशेष सावधानी बरतने और घर के अंदर रहने की सलाह दी गई है।