हर पर्व के पीछे ,एक वैज्ञानिक कारण ,भी होता है

  होली सिर्फ एक त्योहार या परंपरा ही नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण से लेकर आपकी सेहत के लिए भी…
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होली सिर्फ एक त्योहार या परंपरा ही नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण से लेकर आपकी सेहत के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन होली के त्योहार की मस्ती इतनी अधिक होती है कि लोग इसके वैज्ञानिक कारणों से अंजान रहते हैं।

होली मनाने का धार्मिक कारण तो आप जानते ही हैं, लेकिन क्या आप इसका वैज्ञानिक कारण भी जानते हैं?

इस तरह घर पर बनाएं प्राकृतिक रंग और खूब खेलें होली- दक्षिण भारत में जिस प्रकार होली मनाई जाती है, उससे यह अच्छे स्वस्थ को प्रोत्साहित करती है। होलिका दहन के बाद इस क्षेत्र में लोग होलिका की बुझी आग की राख को माथे पर विभूति के तौर पर लगाते हैं और अच्छे स्वास्थ्य के लिए वे चंदन तथा हरी कोंपलों और आम के वृक्ष के बोर को मिलाकर उसका सेवन करते हैं।

कुछ वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि रंगों से खेलने से स्वास्थ्य पर इनका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि रंग हमारे शरीर तथा मानसिक स्वास्थ्य पर कई तरीके से असर डालते हैं। पश्चिमी फीजिशियन और डॉक्टरों का मानना है कि एक स्वस्थ शरीर के लिए रंगों का महत्वपूर्ण स्थान है।

हमारे शरीर में किसी रंग विशेष की कमी कई बीमारियों को जन्म देती है और जिनका इलाज केवल उस रंग विशेष की आपूर्ति करके ही किया जा सकता है।

होली के मौके पर लोग अपने घरों की भी साफ-सफाई करते हैं जिससे धूल गर्द, मच्छरों और अन्य कीटाणुओं का सफाया हो जाता है। एक साफ-सुथरा घर आमतौर पर उसमें रहने वालों को सुखद अहसास देने के साथ ही सकारात्मक ऊर्जा भी प्रवाहित करता है।

जानिए होली पर्व से जुड़े कुछ वैज्ञानिक तथ्य – पलाश के फूल” जो आपको फ्री में उपलब्ध हो जाएंगे उनका जो रंग है उसमें कई पर प्राकतिक गुण मौजूद रहते हैं पलाश के फूलों के रंग से स्वास्थ्य लाभ रोगप्रतिकारक शक्ति व गर्मी सहने की क्षमता में वृद्धि वायुसंबंधी व पित्तसंबंधी अनेक बीमारियों को भगाने की शक्ति मन रक्तकणिकाओं सप्तरंगों व सप्तधातुओं का संतुलन आदि अनेकोनेक फ़ायदे इस रंग में होते है।

आज हर किसी को स्कीन में खुजली और अन्य प्रवलम चल रहीं हे पलास के रस से पूरी तरह छूटकारा मिलता हे 4,,5 दिन रंग से आने वाली गर्मी में भी गर्मी से होने वाली बीमारी से छुटकारा मिलता हे केमिकल वाले रंग से बहुत नुकसान पहुंचा सकता है

रंग कैसे बनायें ~पलाश के फूल को पानी में भिगो दें या सुबह उबालकर उपयोग में लायें एक चुटकी चूना और दो चम्मच हल्दी को आधा प्याला पानी में मिलाकर लीटर पानी में घोलने के बाद उपयोग करें…

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