रंगमंच, सीरियल, फिल्में और वेब सीरिज कर लेने के बाद मनोज बाजपेयी अब एक नए अवतार में नजर आएंगे। वे मंगलवार से डिस्कवरी ऐप और चैनल पर डॉक्युमेंट्री ‘सीक्रेट्स ऑफ सिनौली- डिस्कवरी ऑफ द सेंचुरी’ में एंकरिंग करते दिखाई देंगे। इसे डायरेक्टर नीरज पांडे के बैनर तले बनाया गया है।
मनोज बाजपाई ने अपनी डॉक्यूमेंट्री में बताई सनोली के रहस्य को बताया ,दरअसल सिनौली में पुरातत्व विभाग ने 2005 में खुदाई शुरू की जहाँ उन्हें कुछ महत्वपूर्ण अवशेष मिले।
सिनौली (अंग्रेज़ी: Sinauli) ऐतिहासिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण एक पुरातात्विक स्थल है जो जनपद बागपत, उत्तर प्रदेश में स्थित है। इस स्थान से सिंधु घाटी सभ्यता से संबंधित कब्रें पाई गई थीं। बागपत जनपद की बड़ा़ैैैत तहसील में सिनौली स्थित है। 2005 में खोजा गया सिनौली गाँव भारत में सिंधु घाटी सभ्यता स्थलों की सूची में सबसे नवीन अद्यतन है। यहाँ के तमाम अवशेष 3800 से 4000 वर्ष पुराने हैं। सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल राखीगढ़ी, कालीबंगा और लोथल में खुुदाई के दौरान कंकाल तो मिल चुके हैं किंतु रथ पहली बार मिला है।
पुरा महत्त्व
भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग (आगरा सर्किल) ने हाल ही में एनसीआर सर्किट स्थित जनपद बागपत के सादिकपुर सिनौली गांव की 28.6 हेक्टेयर जमीन को राष्ट्रीय महत्व का क्षेत्र घोषित किया है। ‘आर्कियॉलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया’ की इस घोषणा के साथ ही यह क्षेत्र आगरा सर्किल का 267वां संरक्षित स्मारक तो बना ही है, इसे अंतरराष्ट्रीय मानचित्र में भी महत्वपूर्ण स्थान मिल गया है।
सिनौली गांव में एएसआई अब अधिसूचित जमीन को घेरने की तैयारी कर रही है। हालांकि इस जमीन पर किसान खेती तो कर सकेंगे, बस निर्माण कार्य की अनुमति नहीं होगी। एएसआई जब भी चाहेगा, किसानों की फसल के लिए पैसे का भुगतान कर वहां पर खुदाई कर सकेगा। वैसे इस घोषणा से यहां के ग्रामीण खुश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उनके लिए रोजगार के नए अवसर तो खुलेंगे ही, उनका गांव एक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हुआ तो देश-विदेश के टूरिस्ट भी इसे देखने आएंगे। वैसे सिनौली को संरक्षित स्मारक घोषित किए जाने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इतिहासकार और पुरातत्वविद भी काफी उत्साहित हैं।