फिटनेस एक्सपर्ट्स और ट्रेनर्स ने हमेशा कहा है कि एक्सरसाइज एक अच्छी शेप और स्वस्थ शरीर को बनाए रखने की अहम कुंजी है. एक्सरसाइज के जरिए बहुत ज्यादा कैलोरी बर्न करने से वास्तव में आपको कुछ किलो वजन कम करने में मदद मिलती है, ये तो आप बखूबी जानते हैं लेकिन आप एक्सरसाइज के जिस गुण से अभी तक परिचित नहीं थे, वो है आपके मानसिक स्वास्थ्य इसका प्रभाव. लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि इसका लाभ उठाने के लिए आपको घंटों जिम में काम करना होगा. हालांकि, एक नई स्टडी न से पता चलता है कि मॉडरेट एक्सरसाइज भी अवसाद यानी डिप्रेशन जैसे हेल्थ से जुड़े मुद्दे को दूर रखने में मदद कर सकती है.
जामा साइकेट्री’ जर्नल में हाल ही में प्रकाशित, मेटा-विश्लेषण ने 15 स्टडीज का विश्लेषण करके फिजिकल एक्टिविटी और डिप्रेशन के जोखिम के बीच संबंध का अध्ययन किया. स्टडी में 1,90,000 से अधिक लोगों को यह पता लगाने के लिए शामिल किया गया था कि डिप्रेशन के रिस्क को कम करने के लिए कितनी मात्रा में एक्सरसाइज की जरूरत है.”
स्टडी में क्या निकला -रिसर्चर्स ने पाया कि प्रति सप्ताह 1.25 घंटे ब्रिस्क वॉक के बराबर फिजिकल एक्टिविटी करने से एक्सरसाइज ना करने वाले वयस्कों की तुलना में डिप्रेशन का रिस्क 18% कम होता है. वहीं, जिन लोगों ने 2.5 घंटे ब्रिस्क वॉक के बराबर कोई भी फिजिकल एक्टिविटी की, उनमें डिप्रेशन का खतरा 25 फीसदी कम पाया गया.
इसके अलावा, स्टडी में कहा गया है कि “अधिकतर लाभ तब प्राप्त होते हैं जब कोई एक्टिविटी नहीं से कम से कम कुछ की ओर बढ़ते हैं.” यह भी देखा गया कि अधिक मात्रा में एक्सरसाइज से अतिरिक्त संभावित लाभ कम हो गए और अधिक अनिश्चितता हो गई. रिसर्चर्स ने अंडरलाइन किया कि यदि कम एक्टिव वयस्कों ने करंट रिक्मेंडेट लेवल की एक्टिविटी को एचीव किया होता, तो अवसाद के मामलों का एक महत्वपूर्ण प्रतिशत हल हो जाता.
स्टडी के ऑथर्स का कहना है कि इस स्टडी के निष्कर्ष हेल्थ प्रैक्टिशनर्स को लोगों को बेहतर लाइफस्टाइल की सिफारिशें करने में मदद करेंगे. उन्होंने कहा कि ज्यादातर नॉन एक्टिव लोग अपने फिटनेस लक्ष्यों को अवास्तविक और अविश्वसनीय पाते हैं, लेकिन अब वे मध्यम व्यायाम से भी लाभ उठा सकते हैं.